Sunday, 27 August 2017

मैं, मौसम और हम.....

बारिश रुलाती है ,
ठंड दिलासा दे जाती है ,
और गर्मियां फिर से बारिशों के आने की बेचैनी बढ़ाती हैं.....
सर्दी मैं उस अलाव के पास बैठकर बिताना चाहता हूँ ,
जहां मुस्कुराते हुए अपनी पुरानी बातों की लकड़ियों को आग में डाल दूंगा.....
फिर कुछ नई बातों से नया मौसम बनेगा.....
सुबह उठने पर सब कुछ धुंधला होगा.....
इतना कोहरा होगा कि हमें कोई नहीं दिखेगा.....
सारी बातें जल चुकी होंगी ,
और बस हम अपने नजदीक तक का ही देख सकेंगे.....
धीरे से धूप आएगी ,उसे तापेंगे और शाम को हवायें फिर से सर्द हो जायेंगी.....
इसी तरह मौसम कट जाएगा.....
फिर वही गर्मी होगी जो बेचैनी बढ़ाएगी ,
बारिश का खूब इंतजार करवाएगी..... उन बारिशो का नहीं , जो मैं नहीं चाहता ,जो रुलाती हैं.....
बल्कि उस बारिश का , जो हम और आप इत्मीनान के साथ बिताने वाले हैं.....

©ImSaurabh99

खलिश.....

खुदा में भी इन दिनों कुछ कमी सी लगती है ,
तेरी सूरत तलाश में तो मिलती नहीं है.....
मैं कोई फूलों ,रंगों ,सितारों की बात नहीं कहता.....
सच तो यह है कि तुम्हारे बिना,
शाम की चाय भी जमती नहीं है.....
टांड़ पर रख दी है मैंने अपनी पसंदीदा किताबें ,
न जाने क्यों अब उनमें तबीयत रमती नहीं है.....
शाम को भी भा गई है यह मुंडेर मेरी , कि आकर बैठ तो जाती है मगर ढलती नहीं है.....
न जाने क्यों एक खलिश सी जेहन में रेंगती है ,
और गले में समंदर की प्यास ,
दूर से ही मुझे सुनाई देती है ,
अपनी ही मूक आवाज.....

©ImSaurabh99

⊙दिल⊙

दिल तो बच्चा है.....

अस्तित्व

जिन्दगी है साहब !

⊙बहाना⊙

बरामदे का आइना टूटा मिला है ,
निराश चेहरा छुपाने का बहाना अच्छा मिला है.....
पलट कर देखते हैं बरसों से पड़ी पुरानी चीजों को ,
बीता हुआ वक्त लौटाने का बहाना अच्छा मिला है.....
पुरानी तस्वीरें फिर खोली हैं आज ,
शबो-सुबह दिल बहलाने का बहाना अच्छा मिला है.....
आज फिर अपना पसंदीदा लिबास पहना है मैनें ,
रकीब को जलाने का बहाना अच्छा मिला है.....
तूफान आता है तो बंद कर लो सभी खिड़की दरवाजे ,
अंधेरे में बैठ जाने का बहाना अच्छा मिला है.....
अच्छा हुआ जल गया शहर का इकलौता डाकघर ,
खतों से पीछा छुड़ाने का बहाना अच्छा मिला है.....
यादें रख के सोते हैं तकिये तले इन दिनों ,
नीदों से अदावत का बहाना अच्छा मिला है.....
खोये-खोये चुप-चाप से रहते हैं आजकल ,
लोगों से दूर भाग जाने का बहाना अच्छा मिला है.....

©ImSaurabh99

Monday, 10 April 2017

इक अधूरी कहानी.....

At one point in time ,
She loved him very much & one point he also loved her.
But it breaks heart to think that those points never coincided ,
Just Becoz of his Attitude & Ego .
She saw the beauty in his darkness , He saw the darkness in her beauty.

One day , when they meet accidentally.
She saw him and said Hiiii , but he was continuously seeing her face & remained Silent , but His HEART SKIPPED A BEAT.

PlzzZ don't give any place of attitude & ego in your Friendship , Relationships etc. Becoz a small part of Ego can kill any relationship.

👉उस दिन एक अजीब इत्तेफाक हुआ ,
वो उसी गली से गुजरा जिस गली से वह बचकर चलता था ।
गली में उसके घर के सामने पहुँचते ही उसने देखा कि वो बाहर ही खड़ी थी कार के पास , शायद कहीं जा रही थी ।

उसने जैसे ही उसे देखा , हाथ हिलाकर हाय बोला , लेकिन शायद इस बार एक दोस्त की हैसियत से ही ।
लेकिन उसकी बदनसीबी तो देखो , वो उसको Hello भी न बोल पाया , बस उसको देखता रहा देखता रहा , मानो फिर कभी मिलेगा ही नहीं ।
न ही किसी ने कुछ भी बोला ।
उसको देखते देखते ही वह उसकी गली से बाहर निकल गया ।
वो भी खड़ी होकर बस उसे ही देखती रह गयी.....
मानो कुछ वापस आया था जो एक पल भी न रुका ।
वह आंधी की तरह आया और तूफान की तरह सब झकझोर कर चला गया.....👈

👉ये अधूरी कहानी 3 साल पहले शुरू हुई थी ,
उन दोनों ने नया नया एडमिशन लिया था , लेकिन एक दूसरे को उनमे से कोई भी नहीं जानता था ।
इक दिन वो उसके क्लास में आयी , शायद अपने किसी friend से मिलने , तब उन दोनों ने एक दूसरे को पहली बार देखा । वो लड़का जो किसी की तरफ देखता भी नहीं था , उसने उसकी तरफ देखा लेकिन तुरंत ही सिर नीचे कर लिया , लेकिन वो शायद अभी भी उसको देख रही थी ।
फिर वो चली गयी , लेकिन कुछ तो था जो चुभ सा रहा था ।
बड़ी बात तो तब हुई जब दोनों को घर भी एक ही वैन से जाना था , उससे भी बड़ी बात तब हुई जब दोनों के घर भी पास ही थे बस 400m की दूरी पर.....

उसके मन में उसके लिये कुछ तो था जो बढ़ता ही जा रहा था ,
लेकिन वो उसे एक अच्छा दोस्त ही मानता था , शायद मानता भी था लेकिन उसका Attitude , Ego इस बात को मानने न देता था । पहली बार कोई उसको भी अच्छी लगी थी , लेकिन वो इस बात को बिलकुल भी दिखाता न था ,
लेकिन वो दिखाती भी थी और उस पर अपना हक भी जता देती थी । सब कुछ सही चलता रहा , वो उसको चाहती रही  लेकिन वो था कि कुछ मानने को तैयार ही न था ।

उसने उसका Mob no. मांगा , लेकिन वो बोला Sorry ! मैं अपना नम्बर किसी को नहीं देता.....उसकी ये उम्मीद भी टूट गयी ।
वो भी उससे नफरत नहीं करता था बस अपना दोस्त मानता था क्योंकि उसका Attitude उसको और कुछ देखने ही न देता था । वो भी उसको बहुत अच्छी लगती थी , वो उसको देखता तो रहता था बस जाहिर न होने देता था ।
लेकिन वो थी कि कुछ मानने को तैयार ही न थी , उसको कहीं न कहीं ये लगता था कि ये भी बात तो समझ ही जायेगा ।
वो समझ तो चुका ही था लेकिन Ego उसको रोक देता , जिससे एक बनता हुआ रिश्ता बनने से पहले ही टूटने लगा.....
शायद टूट भी चुका था , लेकिन उसको अभी भी उम्मीद थी कि वो वापस जरूर आयेगा.....वो भी कहाँ दूर जाना चाहता था लेकिन कभी कह न पाया.....
इसी तरह 2 साल बीत गये , और कोचिंग अपने आखिरी पड़ाव पर थी ।

जिस दिन कोचिंग का आखिरी दिन था वो सबसे पहले जाकर वैन में आगे बैठ गयी सबने कहा PlzzZ पीछे बैठ जाओ मुझे आगे बैठना है लेकिन वो न उठी । लेकिन जैसे ही वो आया और उसने कहा कि PlzzZ पीछे बैठ जाओ , वो उसकी तरफ देखती रह गयी और उठकर पीछे बैठ गयी , फिर वो भी जाकर पीछे ही बैठ गया ।
वैन में अभी कोई भी न था , उसने कहा आज तो अपना नम्बर दे दो , लेकिन वो कुछ न बोला । उसने फिर कहा मैं कभी Call नहीं करुंगी , लेकिन वो कुछ बोल न पाया.....

वैन पहले उसके(She) के घर जाती थी , इसलिए उसको उसका घर पता था लेकिन उसको(She) उसका घर नहीं पता था ।
वैन उसके घर पहुँची , वो उतरी और उसको बिना देखे ही Good bye बोलकर चली गयी , एक बार फिर वो उसको देखता ही रह गया.....बस देखता रहा.....

सारी उम्मीदें टूट चुकी थी ,
उसके बाद वो शहर से बाहर चला गया फिर उससे कभी न मिला.....

आज शायद किस्मत ने उनको फिर एक मौका दिया था , लेकिन ये भी हाथ से जा चुका था.....

2 दिन बाद वो उसके घर के सामने गया , लेकिन तब उसे पता चला कि वो उसी दिन चली गयी जिस दिन वो उससे मिला था.....

एक रिश्ता जो शुरू होने से पहले ही खत्म हो गया.....

आज भी उसके Phone का auto correct सबसे पहले उसी का नाम Suggest करता है , तब वो खुद को रोक नहीं पाता , वो उसका नाम Facebook पर search करता है , वो नाम तो दिखता है , लेकिन वो चेहरा कहीं नजर नही आता.....
कहीं नजर नहीं आता.....👈
💕💕💕💕💕😘😘😘😘😘

👉शायद एक सच्ची कहानी.....
Written by me.....👈
🙏🙏🙏🙏🙏

Saurabh Shukla
(ImSaurabh99)

Monday, 4 July 2016

जिन्दगी...

सवाल ये था कि सफर खत्म क्यों नही होता जबाब यह है कि सफर शुरु तो हो?जिन्दगी अजीब सवाल करती हैऔर,खुद ही अजीब जबाब भी देती है।कभी शाम सुहानी कही दूर लेके जाना चाहती है ,तो कभी शाम गम की दोपहर सी लगती है,कभी सफलता के मिलने पर गर्मी में दोपहर की सड़कों पर भी पाँव नही जलते ,और कभी बरगद की छाँव भी जलाती है , मेरी जिन्दगी भी कमोबेस ऐसे ही प्रश्नों से भरी पड़ी है,कभी एहसास ऐसा है कि बुलन्दी पैरों में है पैरों में इसलिए कह रहा हूँ कि बुजुर्गों ने सिखाया है कि सफलता को कभी भी सर नही बिठाना चाहियेऔर,कभी लगता है नियति के पैर ही सर पर आ गये हैं झंझावतों से जूझती जिन्दगी ।अदावतों से जूझती जिन्दगी ,मुहब्बतोँ को खोजती जिन्दगी * नफरतों में छटपटाती जिन्दगी , तनहाई में घबराती जिन्दगी , महफिल में लजाती जिन्दगी*एहसासों को लपेटती जिन्दगी ,आँसुओं को समेटती जिन्दगी -फागुन सी हसीन जिन्दगी *जेठ सी जलती जिन्दगी , विधवा के श्रृंगार सी जिन्दगी ,राम की जीत सी जिन्दगी , सिकन्दर की हार सी जिन्दगी ,मरुस्थल में झील सी जिन्दगी , पैरों में कील सी जिन्दगीपहली तनख्वाह सी जिन्दगीगरीब की बेटी के विवाह सी जिन्दगीलाल किले से भाषण सी जिन्दगीगरीबों के राशन सी जिन्दगीसुकून में पाकिस्तान सी जिन्दगीबेपरवाही में हिन्दुस्तान सी जिन्दगीराम का वनवास जिन्दगीहरदम एक काश जिन्दगीहल्दीघाटी का रण जिन्दगीराणा का प्रण जिन्दगीआजाद का वतनहै जिन्दगीभीष्म का बचन है जिन्दगीखुशियोँ का अवशेष है जिन्दगीब्रह्मा ,विष्णु ,महेश है जिन्दगी।

जिन्दगी तुझे सलाम ।।

धन्यवाद ।