Wednesday, 10 May 2017

A Story : Without any Title

It certainly hurts.
You are trying your best , but things are just not coming together as a WHOLE.
😔😔😔😔😔

इंसान अगर अपनी ही गलतियों से सीखना चाहे तो उसकी पूरी जिन्दगी कम पड़ जायेगी.....

पिछली गलती को तो नहीं दोहराया मैनें ,
लेकिन इस बार शायद उससे भी बड़ी बेवकूफी कर दिया ।
इक ऐसी गलती जो मुझे गलती से भी नहीं करनी चाहिये थी , वो मैनें गलती से कर ही दिया.....जिसको मैं कभी भी भूल न पाउंगा ।
कुछ यूं हुआ कि Que no. 22 to Que no. 29 मैनें लगातार सही करके पेपर में टिक कर दिये थे , फिर मैनें OMR भरते समय 22 को 23 में कर दिया , क्योंकि सवाल मैनें लगातार कर रखे थे तो मैनें बिना Que no. देखे ही 22 से 29 तक कर डाला ।
22 को 23 मे और इसी तरह 29 को 30 में कर दिया ,
और इस तरह मैनें Maths के लगातार 8 सवाल गलत कर दिये , हालांकि इसका शक मुझे तब हुआ जब मैनें Ans key से Ans match करना शुरू किया , जब मैनें देखा कि 30 no. सवाल तो मैनें किया ही नही है , जबकि मुझे याद था कि OMR में तो मैनें कर रखा है , क्यूंकि 30 no. सबसे नीचे था इसलिए मुझे ये बात याद रह गयी थी ।
तब मुझे शक इस बात का हुआ कि कहीं मैनें 22-29 सारे ही गलत तो नहीं कर दिये ।
खैर जो होना था हो चुका था , फिर मैनें अपने को तसल्ली देते हुये सोचा कि ऐसी गलती तो मैं नहीं कर सकता.....
वैसे पेपर उतना अच्छा तो नहीं हुआ था ,थोड़ा सा डर लग रहा था इसलिए मैनें नम्बर पापा से Count करवाया ,  Cut off से ठीक ठाक ऊपर स्कोर हो रहा था , लेकिन ये वाली बात मैनें उनको बताया नहीं , जो होगा रिजल्ट में साफ हो जायेगा ।

रिजल्ट आया ,पता चला कि Cut off काफी गिर चुकी है इस बार , फिर तो मैं बहुत खुश हो गया.....
रिजल्ट देखा मैनें , जिसका डर था वही हुआ..... मुझे तो भरोसा ही नहीं हुआ कि ये सब हो चुका है , मैं बस रिजल्ट को ही देखे जा रहा था.....
इस कट आफ से मुझे अच्छा खासा कालेज मिलना तय था , लेकिन कुछ ऐसा हुआ कि मैं 2 Marks से Competition से ही बाहर हो गया.....
खैर जो होना था हो चुका था ।
फिर निराशा का दौर आया ,
Life में इससे ज्यादा निराश मैं कभी भी नहीं हुआ था.....
रो पड़ा मैं , बात ये नहीं थी कि मेरा Selection नहीं हुआ , बात ये थी कि उसकी वजह मेरी बेवकूफी थी ।
उस दिन मैनें किसी से भी बात नहीं की , सुबह तक मेरी तबीयत ही बिगड़ने लग गयी ,
Migraine का इलाज भी अभी अभी बंद ही हुआ था , ज्यादा तनाव होने से परिणाम ये हुआ कि मेरी तबीयत काफी ज्यादा बिगड़ गयी ,
और हालात बहुत बिगड़ गये.....

डिप्रेशन में मैं कुछ इस कदर जा चुका था कि डाक्टर से भी बात नहीं की मैनें , 4 साल से डाक्टर Maneesh Singh ने मेरे Migraine का इलाज किया था लेकिन इस बार वो भी थोड़े परेशान हो गये ,क्योंकि 4 दिन बाद उनको आस्ट्रेलिया जाना था और मेरी हालत बिगड़ चुकी थी ।
लेकिन जब आपकी पूरी Family आपके साथ हो तो आप किसी भी डिप्रेशन से बाहर आ सकते हैं.....
मैं भी धीरे धीरे नार्मल हो गया.....

मैं घर आ गया , सबके लिये सब पहले जैसा था लेकिन मेरे लिये सब बदल चुका था.....

सबको पता थी बात  , लेकिन कुछ लोग होते ही अजीब से हैं ,पापा को फोन करके पूछते कि रिजल्ट का क्या हुआ ?
पापा बड़ी इज्जत से उनके सवाल का जवाब देते ।
एक महाशय ने दोबारा फोन करके कहा कि उससे कह दो कि Bsc कर ले कहीं से ।
फिर मेरी बारी थी , मैनें फोन पापा से लेके उनको तरीके से सुना दिया , गुस्से में मैनें कह दिया कि मेरी जगह अपने बच्चों पर ज्यादा ध्यान दें , और हां जितना बदतमीज आप मुझे समझ रहे होंगे उससे कहीं ज्यादा बदतमीज हूं मैं , इसलिए अगली बार जरा ध्यान से.....

एक सपना था जिसके अब तक टुकड़े टुकड़े हो चुके थे ।
लेकिन वो कहते हैं न कि ,
"सपना टूटा है तो दिल कभी जलता है ,
हाँ थोड़ा दर्द हुआ , पर चलता है ।"

अभी हार नहीं मानी मैनें , क्योंकि मुझे बहुत ही प्यारे दोस्त की बात याद आ गयी "Itte mein he thak gaye ?"

अभी यहाँ पर ही नहीं रुक जायेंगे अप्पन ,
Ultimately जो लक्ष्य है अपना , वहाँ तक तो पहुँच कर ही रुकेंगे.....

करबो ! लड़बो ! जीतबो रे !
💪💪💪💪💪✊✊✊✊✊