वो किस्सा जो कहानी बन नहीं पाया, वो किस्सा भी बस यहीं तक था शायद.....!!!!! उस दिन मैं तुमसे ही कह रहा था, जो चल रहा है चलने दो, समय के साथ हम खुद ही एक दूसरे को देख कर नजरें फेर लिया करेंगे, और आज हमने बिना एक-दूसरे को देखे ही आँखें फेर ली.....!!!!! अफ़सोस सिर्फ इतना सा है, कि अंजाम तो मिला नहीं, मैं उस कहानी को इक ख़ूबसूरत मोड़ भी दे नहीं पाया, जहाँ उसे छोड़ सकें.....!!!!! पर हाँ..... इस जन्म में न सही, लेकिन किसी जन्म में जब हम फिर मिलें, तो खुदा से अपने साथ मेरा साथ मांग लेना, मेरी तो वो वैसे भी नहीं सुनता.....!!!!! उस जन्म में महज इक ख़ूबसूरत मोड़ न हो, बल्कि एक रिश्ता हो खूबसूरत सा.....!!!!! जहाँ मैं तुमसे जी भर के लड़ सकूं, ज़िन्दगी भर.....!!!!! ~ सौरभ शुक्ला
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